उम्मीद
जब ना हूँगा
इस जहां मैं
होगे मेरे
लब्ज तो लेकिन
जब जाऊँगा
छोडके दुनिया
ना रेह पावूं
वहाँ पे तुम बिन।
उन्ही लब्ज को
पास ही रखना
याद आने पर
थोडा चखना
फिर भी ना आवे
चैन जो तुमको
हमसे तब
शिकवे ना रखना।
लौट के आऊं
तुमसे मिलने
छोड़ी से ये
राह भी तकना
जब भी आऊं
जहां भी आऊं
मुझको आपने
पासही रखना।
वादा मेरा
फिर आने का
उम्मीद हमेशा
कायम रखना।
-अमित श्री . खरे
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