सदा के लिए
आज फिर मेहसूस हुवा
मेरे साथ हो तुम
सदा के लिए
ना होगा दवा का असर
तेरी दुवा तोह होगी
सदा के लिए।
ये जो एहसास है
वोही जीने की वजहा है
सदा के लिए
ना छोड़ेंगे साथ
हाथो मैं है हाथ
सदा के लिए।
तुमसे बात करता हूँ तो लगता है
जैसे ये बात होती है
सदा के लिए
बिछड़ भी जाता हूँ तुमसे तोह लगता है
ये दूरी ना होगी
सदा के लिए।
ये बातें तुम्हारी मेरी
ये ना बदलेगी
सदा के लिए
ये वादा साथ चलने का
साथ ही रहेगा
सदा के लिए।
-अमित श्री . खरे
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